Word TRAP !

जब भी लिखना चाहा है, तभी याद आया है , शब्दों के जाल में कहीं खुद को पाया है||

खामोशी

कैसी खामोशी है यें ? जो कभी पहेली लगतीं है , तो कभी वास्तविकता |

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