दो पल की सासें ही तो है तुम्हारी , आख़िर एक टूटा फूल ही तो हो तुम |
Ek Pagal Ladki Hai Woh . . . .
Kahase shuru karu yeh kahani Saare kisse hai aj batani
बदलता बदलाव !
दुनिया बदल रही है शायद उसके आकार में हम भी !
Word TRAP !
जब भी लिखना चाहा है, तभी याद आया है , शब्दों के जाल में कहीं खुद को पाया है||
खामोशी
कैसी खामोशी है यें ? जो कभी पहेली लगतीं है , तो कभी वास्तविकता |