
दो पल की सासें ही तो है तुम्हारी ,
आख़िर एक टूटा फूल ही तो हो तुम |
किसिको मनाना या फिर किसिको फ़साना ,
अपनी सुंदरता और ख़ुशबू से सबका मन बहलाना …
जिस दिन तोड़ा , उसी दिन खो दिया जड़ों को तुमने ,
किसी और के लिए ही सही , बस दो दिन ज़ीलों ..
उतने वक्त तक थोड़ासा हंस लेना तुम ,
एक प्यारा सा एहसास छोड़ जाना तुम …
दो पल की सासें ही तो है तुम्हारी ,
आख़िर एक टूटा फूल ही तो हो तुम |
This is lovely and beautiful poem. Bahut hi shandar rachna… 👍💯👍
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Thank you 😊
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