आख़िर एक टूटा फूल ही तो हो तुम |

दो पल की सासें ही तो है तुम्हारी ,
आख़िर एक टूटा फूल ही तो हो तुम |

किसिको मनाना या फिर किसिको फ़साना ,
अपनी सुंदरता और ख़ुशबू से सबका मन बहलाना …

जिस दिन तोड़ा , उसी दिन खो दिया जड़ों को तुमने ,
किसी और के लिए ही सही , बस दो दिन ज़ीलों ..

उतने वक्त तक थोड़ासा हंस लेना तुम ,
एक प्यारा सा एहसास छोड़ जाना तुम …

दो पल की सासें ही तो है तुम्हारी ,
आख़िर एक टूटा फूल ही तो हो तुम |

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