
पल में बदलती है ज़िंदगी
एक पल में दोस्ती तो दूसरे में अजनबी
पल भर में ख़ुशी तो बेवक्तकी उदासीं
पल भर का सुकून तो कही खोया मन
पल भर में सितारों सा आशियाँ तों वही दूसरे पल में सुनासा यह जहाँ
क्यू हर पल तरसातींहै ज़िन्दगी
एक पल में मुसीबत तो पालक झपकतेही राहत
ना जाने कितनोने किया ह इस पल का इंतेज़ार
पर पल ने तो पल भर में ही किया बेहाल
कितने पलों के लिए है तरसें
पर यें पल उनपे भी ना बरसें
शायद इसी पल के लिए है पल भर का इन्तज़ार
पर यही पल ने ना किया पल का ऐतबार
कोशिश की है समाऊँ इस पल में प्यार
पर यें पल भी ना रहा पल के लिए तयार
खोजा है पल में पल की हस्ती
पर मिलीं है तों बस्स कही धुंधली बस्ती
चाहत के सफ़र में राहत बने यह पल
पर राहत की गहरायी समझ ना सके यह पल
चकाचौंध रोशिनी में दौड़ते है पल
अंधेरों के बादल में रुकते भी है पल
सोचा जबभि गुज़रे यें पल
पाया तभी थमे हुए पल
बीतते है दिन बीतती है रात
पर यह पल भी ना जाते कभी देके मात
दौड़ते वक्त को ना रोक सके यह पल
रुके वक्त पे ना क़ब्ज़ा कर पाए यह पल
शहरकि भागदौड़ी में भी तेहेल्ते है पल
गाँव की शान्ति में भी सिमट जाते है पल
दुनियादारी के मायावी पल में वफ़ादारी भी बने बेपल
पल पल की आस लिए बैठीं हूँ
कही किसी गगन से कोई सितारा मिल जाए
ताकि मन यह मेरा कहे उसे कीं मुझे कुछ सुकून के पल देजाए
कहते है पल कभी पल के लिए नहीं रुकता
पल भर के लिए भी ना अपना बनाता
बस्स रेहे जाती है इनहि पलों की यादें
जो पलों में ही बस्स है बहें
कई बार कुछ पल धड़कने सुनातीं है
तों वही कुछ चुराती है
इन पलों के मायने भी ना यह पल समझा पाएँ
इसी तरह यह पल बस्स पल ही बने रह जाए
👌👌
LikeLiked by 2 people
Beautiful expression. Thank you
LikeLiked by 2 people